PAIAC & CPC PAIAC & CPC PAIAC & CPC
SOCIETY NAME SUGGESTED BY MR. JUSTICE MANMOHAN SARIN LOKPAL DELHI THE THEN JUSTICE HON'BLE
DELHI HIGH COURT IN CWP NO. 3390 OF 2000 RAJESH KUMAR BHARTI VS GOVT. OF INDIA
 
KriyaKalap
रक्त दान शिविर 2010
सिलाई सेन्टर
रक्त दान शिविर 2011
स्वास्थय कैम्प
Society and Lions Club
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सोसायटी संविधान
 सोसायटी का संशोंधित संविधान  (प्रथम संशोधन)
 धारा-1
सोसायटी का नामपीप्ल्स आल इन्डिया एन्टी करपशन एन्ड क्राईम प्रिवेन्शन् सोसायटी
  धारा-2सोसायटी का पंजिकृत कार्यालयमुख्य कार्यालयः- डब्ल्यू जैड- 90 /5, केशोपुर गांव, विकासपुरी, नई दिल्ली- 110018
  धारा-3सोसायटी का    कार्यक्षेत्र , रंग और चिन्ह समस्त भारत, सफेद नीला, लाल और पीला, तुला और शेर
 धारा-4 सोसायटी के कार्य एवं उद्वेश्य

 उपधारा-1नागरिकों के सवैंधानिक मानव और मूल अधिकारों का सरंक्षण करना
 उपधारा-2महिलाओं को समाज में पुरूष के बराबर का दर्जा दिलाना और महिलाओं के उत्थान के लिए सरकार की नीति अनुसार सरकार और प्रशासन से पूर्ण सुविधायें प्रदान कराना और महिलाओं का आर्थिक स्तर ऊँचा करने तथा चरित्र निर्माण करने के लिए प्रयास कराना।
 उपधारा-3नवयुवकों को स्वयं व्यवसाय करने के लिए धन का उचित प्रबंध कराना और उनके शिक्षा का स्तर को ऊँचा करना  और चरित्र निर्माण करने के लिए प्रयास करना।
 उपधारा-4नागरिकों को शिक्षित  करने के लिए सरकार और सोसायटी के सहयोग से शिक्षण संस्थाये खुलावना और शिक्षा पाने के लिए गरीब नागरिकों की आर्थिक साहयता करना और निःशुल्क कापियां व किताबे उपलब्ध कराना।
 उपधारा-5समाज से दहेज प्रथा, क्षेत्रवाद, छूआ-छूत, जातिवाद व अन्य प्रकार की सभी कुरीतियों को लोगो को जागरूक करके जड़ से समाप्त करने और मानव हित के नये समाज का निर्माण करने की कोशिश करना।
 उपधारा-6देश और राज्यों में कानून और व्यवस्था बनाये रखने, अमन और चैन बनाये रखने के लिए कार्यपालिका को पूर्ण सहयोग देना।
 उपधारा-7देशो में फैले भ्रष्टाचारियों को समाप्त करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य करना और भ्रष्टाचारियों के विरूध कानूनी कार्यावाही कराने का कार्य करना तथा सरकार और कार्यपालिका को इस कार्य में पूर्ण सहयोग देना।
 उपधारा-8नागरिकों और सरकार, नागरिकों और प्रशासन, नागरिकों और नागरिकों और प्रशासन , के बीच की कड़ी बन कर नागरिकों के प्रतिनिधियों के रूप में उनके सभी कष्टों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से पत्राचार करके, सरकार और कार्यपालिका से मिलकर या आवश्यकता अनुसार न्यायालय की सहायता पाकर करवाना।
 उपधारा-9देश में पनप रहें अपराधों की रोकथाम करने के लिए सरकार और कार्यपालिका को पूर्ण सहयोग और सलाह देना।
 उपधारा-10सरकार की नीति अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ावर्ग, आर्थिक स्तर पर पिछड़ा वर्ग, महिलांये, विकलागों, वरिष्ठ नागरिको और बच्चो को निःशुल्क कानूनी सलाह और सहायता दिलाना।
 उपधारा-11नागरिकों को भारत के संविधान, नियमों, अधिनियमों और स्थाई आदेशो का आदर और पालन करने के लिए जागरूक करके उन पर चलने के लिए प्रेरित करना व करवाना।
 उपधारा-12नागरिकों को राष्ट्रीय भाषा हिन्दी को अपनाने और उस का प्रचार-प्रसार करने के लिये प्रेरित करना।
 उपधारा-13बेरोजगार युवको को रोजगार प्रदान कराने, स्वयं का व्यवसाय करने में उनकी सहायता करना और सरकार से आर्थिक सहायता प्रदान करना।
 उपधारा-14              
नागरिकों के स्वास्थय के लिए सरकार की निति के अनुसार चिकित्सालयों, जलाशयों, बिजली और पानी तथा सफाई का उचित प्रबन्ध कराना।
 उपधारा-15सरकार के सहयोग से विकलागों को निःशुल्क विकलाग रिक्शा उपलब्ध कराना।
 उपधारा-16देशो के पिछड़े क्षेत्रों में मार्ग, बिजली, पानी, खाद्य सामग्री और परिवहन की व्यवस्था कराना।
 उपधारा-17भारत सरकार व प्रदेश  सरकारों की नीतियों को जन-जन तक पहुचाँना और नागरिकों को सरकार की सभी नीतियों का लाभ दिलाना।
 उपधारा-18ग्रामीण क्षेत्रों को सरकार की नितियों की जानकारी देने के लिए गांव में शिविरों का प्रबन्ध करके सभी विभागों के प्रमुखों को आमंत्रित करके ग्रामीणों को सरकार की नीतियों की जानकारी दिलाने का प्रबन्ध करना।
 उपधारा-19नागरिकों को अपने संवैधानिक मूल अधिकारों तथा कर्तव्यों की जानकारी देने के लिए उच्चतम् न्यायलय, उच्च न्यायलयों, जिला न्यायलयों के वर्तमान और भूतपूर्व न्यायधिशों  , महानगर दण्डाअधिकारियों, जिला दण्डाधिकारियों, सरकारी तथा गैर सरकारी विधि अधिवक्ताओं को आंमत्रित करके गांव व शहरो में शिविरों  के आयोजनों को प्रबन्ध करना।
 उपधारा-20नागरिकों को मानव अधिकारों की जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य मानव अधिकार आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों को आमंत्रित करके गांव व शहरों  शिविरों  का आयोजन कराने का प्रबन्ध कराना।
 उपधारा-21परिवार नियोजन निति के अनुसार नागरिकों को परिवार नियोजन की पूर्ण जानकारी देना और इस कार्य मे सरकार की सहायता करना।
 उपधारा-22सोसायटी के सदस्यों तथा नागरिकों को उनके कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करना।
 उपधारा-23नागरिकों में मेल-मिलाप बढ़ाने और उनके चरित्र एवं रहन-सहन और शिक्षा  का स्तर ऊँचा करने की कोशिश  करना।
 उपधारा-24सार्वजनिक तथा धर्मार्थ भवनों का निर्माण करना।
 उपधारा-25सोसायटी के हर सदस्य की बीमारी, बेकारी और मुकदमे की अवस्था में समय के अनुसार सहायता करना।
 उपधारा-26बेरोजगार युवकों को रोजगार प्रदान करने के लिए भारत सराकर और राज्य सरकारों से सहयोग/अनुदान लेकर देश  और समाज के विकास और कल्याण के लिए कोई योजना चालू करना।
 उपधारा-27गरीब नागरिकों को र्दवाईयां निःशुल्क  बांटना।
 उपधारा-28गरीब बीमार नागरिकों शीतकाल में कम्ब, जर्सियां व जूते आदि बाँटना।
 उपधारा-29गरीब बीमार नागरिकों के इलाज के लिए योग शिविरों , प्राकृतिक चिकित्सा पद्धिति एक्यूप्रेशर  और एक्यूपैन्चर पद्धिति के चिकित्सको व बुद्धिजवियों की सहायता से शिविरों लगवाकर उनका इलाज निःशुल्क कराना।
 उपधारा-30गरीब क्षेत्रों में सरकार के सहयोग से महिलाओं के लिए सिलाई, कढ़ाई का प्रशिक्षण  देने के लिए प्रशिक्षण केन्द्र खुलवाना तथा प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को निःशुल्क सिलाई और कढ़ाई की मशीनों  का बांटना।
 धारा- 5
 सोसायटी के कायदे
 उपधारा-1     
सभी सदस्य अवैतनिक होगे। कोई भी सदस्य या पदाधिकारी सोसायटी से वेतन नही लेगा। कार्यकारिणी या आम सभा का कोई सदस्य अनुमति लेकर जो सोसायटी के कार्य के लिए अपने जेब से खर्च करेगा। वह राशि सोसायटी की धारा- 35 के अनुसार वह राशि सोसायटी की पूंजी में से दी जाऐगी। सोसायटी के कार्य के लिए सदस्य से ली हुई राशि का ब्याज तथा मकान किराया जो सोसायटी के प्रयोग के लिए लिया गया हो तो सोसायटी सोसायटी की आय में से दिया जायेगा।
 उपधारा-2यदि सोसायटी को कोई भी लाभ होगा या आमदनी होगी तो वह राशि सोसायटी के हित के लिए खर्च की जायेगी। किसी कारण वष सोसायटी/ संस्था के बदं होने की स्थिति में संस्था की सम्पति, लेनदारी या देनदारी का कोई भी सदस्य या व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से जिम्मेवार नही होगा। अपितु ऐसी स्थिति मं समान विचारधारा वाली संस्था या सोसायटी को सौंप दी जायेगी।
 उपधारा-3जो सदस्य सोसायटी के विरूध कार्य करेगा उसकी सदस्यता पूर्ण जांच पड़ताल के बाद दोषि पाये जाने के बाद समाप्त कर दी जाएगी।
 उपधारा-4सभी सदस्यों की एक सूचि तैयार की जाएगी। जिसमें उन का नाम व पूरा पता होगा।
 उपधारा-5दोबार से सदस्यता बहाल कराने के लिए सोसायटी के प्रति वफादार रहने का शपथपत्र देना होगा तथा निर्धारित सदस्यता शुल्क देना होगा।
 उपधारा-6शाखाओं द्वारा सदस्यता शुल्क की राशि सोसायटी के संविधान अनुसार सोसायटी मुख्यालय में जमा करना हो


  1.  धारा- 6  सदस्यता शुल्क

    उपधारा-1

    आजीवन सदस्यता शुल्क 5100/- रूपये, एसोसिएट सदस्यता शुल्क 2100/- रूपये और आम सदस्यता शुल्क 100/- रूपये होगा। जो केवल एक बार सदस्य बनने पर देना होगा। इस के अतिरिक्त कुछ अन्य धन सोसायटी के विकास के लिए लिया जाएगा। जो समय -2 पर सोसायटी मुख्यालय द्वारा निर्धारित होगा। वह शुल्क सदस्यता धारण करते समय देना जरूरी होगा।
    उपधारा-2सोसायटी का सदस्य बनने केक लिए सोसायटी के द्वारा जारी फार्म भरना होग। जो सोसायटी के मुख्यालय और सभी शाखाओं के कार्यालय में उपलब्ध होगा और सोसायटी की वेबसाईट पर भी ऑनलाईन फार्म भरा जा सकता है।

     धारा- 7
     चंदा और शर्तें
     उपधारा-1चंदा 600 रूपये वार्षिक होगा जो वर्ष में एक बार जनवरी में लिया जाऐगा।
     उपधारा-2सभी सदस्यों को जनवरी मास में सम्बन्धित फाईनैंस सैक्टरी  के पास अपना वार्षिक चंदा जमा करवाना होगा।
     उपधारा-3अगर कोई सदस्य एक साल तक चंदा जमा नही करता तो उसकी सदस्यता समाप्त कर दी जाऐगी।
     उपधारा-4दोबारा सदस्यता पाने के लिए सदस्यता शुल्क और बकाया चंदे का भुगतान करना होगा।
     उपधारा-5रसीद कटने के बाद सदस्यता शुल्क और चंदे की राशि वापिस नही होगी।
     उपधारा-6शाखाओं द्वारा चंदे की राशि का 40 प्रतिशत भाग स्वयं रखा जाऐगा ओर 60 प्रतिशत भाग मुख्यालय में जमा कराना होगा।

    धारा-8
    सोसायटी की मुख्य कार्यकारिणी के निम्नलिखित पदाधिकारी होगें

     उपधारा-1 पद का नाम  पद की संख्या
     उपधारा-2राष्ट्रीय अध्यक्ष
     एक पद
     उपधारा-3राष्ट्रीय प्रबन्धक निदेशक दो पद
     उपधारा-4राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष चार पद
     उपधारा-5राष्ट्रीय उपाध्यक्षआठ पदः आवश्यकता अनुसार बढ़ाये जा सकते है।
     उपधारा-6राष्ट्रीय महासचिव एक पद
     उपधारा-7राष्ट्रीय सचिवएक पदः आवश्यकता अनुसार बढ़ाये जा सकते है।
     उपधारा-8राष्ट्रीय सयुक्त सचिव
    एक पदः आवश्यकता अनुसार बढ़ाये जा सकते है।
     उपधारा-9राष्ट्रीय वित्त सचिव
     एक पद
    उपधारा-10राष्ट्रीय प्रकाशन सचिव
     एक पद
    उपधारा-11राष्ट्रीय सहायक प्रकाशन सचिव
     एक पद
    उपधारा-12राष्ट्रीय प्रचार सचिव
     प्रति राज्य एक पद
    उपधारा-13 राष्ट्रीय प्रैस सचिव
    चार पदः आवश्यकता अनुसार बढ़ाये जा सकते है।
    उपधारा-14राष्ट्रीय लेखा परिक्षक
    एक पद
    उपधारा-15राष्ट्रीय मुख्य संगठनकर्ता
     एक पद
    उपधारा-16 राष्ट्रीय संगठनकर्ता  प्रति राज्य एक पद
    उपधारा-17राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य
    30 पदः आवश्यकता अनुसार बढ़ाये जा सकते है।

     उपधारा-18 राष्ट्रीय कार्यकारणी के निजि सुरक्षा कर्मीदस पदः आवश्यकता अनुसार बढ़ाये जा सकते है।

     इसके अतिरिक्त और पद भी बनाये जा सकते है। मुख्यालय की कार्यकारणी को राष्ट्रीय कार्यकारणी और शाखाओं की कार्याकारणी को शाखा कार्यकारिणी के नाम से सम्बोधित किया जायेगा और शाखाओं में कार्यकारी निदेशक, प्रकाशन सचिव, सहायक प्रकाशन सचिव ओर विधि अधिकारीयों के पद नही होगें। सयुक्त सचिव, प्रैस सचिव और संगठनकर्ता के एक-1 पद होगें तथा शाखा अध्यक्ष अपनी शाखा में 5 सुरक्षाकर्मी और एक गुप्तचर रख सकता है। ( सुरक्षा कर्मी अवैतनिक होगें। जो अपनी इच्छा से सोसायटी के जनहित में सहयोग दे सकते हो।) सुरक्षा कर्मीयों से सदस्यता शुल्क, वार्षिक चंदा और सोसायटी विकास फंड नही लिया जाऐगा।

     धारा-9 सोसायटी की महिला कार्यकारिणी

    सोसायटी की महिला सैल की कार्यकारिणी उपरोक्त सोसायटी की धारा- 8 के अनुसार ही पदाधिकारी होगे।

     धारा-10 सोसायटी की युवा कार्यकारणी
    सोसायटी की युवा वर्ग कार्यकारणी की कार्यकारिणी उपरोक्त सोसायटी की धारा- 8 के अनुसार ही पदाधिकारी होगे।

     धारा- 11  राष्ट्रीय कानूनी सलाहकार समिति
     उपधारा-1 राष्ट्रीय मुख्य सलाहकार एक पद
     उपधारा-2राष्ट्रीय सलाहकार पांच पद आवश्यकता अनुसार बढ़ाए जा सकते है।
    सोसायटी आवश्यकता अनुसार अपनी कानूनी सलहाकार समिति गठित कर सकती है। सलाहकार समिति उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों, जिला और सैंशन न्यायालयों के वर्तमान एवं भूतपूर्व न्यायाधीशों को और सरकारी विभागों के वर्तमान और भूतपूर्व जिला न्यायवादियों, सहायक जिला न्यायवादियों, वकीलो, वरिष्ट नागरिक को कानूनी सलाहकार समिति का सदस्य बनाया जा सकता है और राज्यों के हर जिले में एक-2 जिला कानून अधिकारी होगा तथा जिला कानूनी अधिकारी आवश्यकता अनुसार अपने जिले की जिला कानूनी समिति का गठन कर सकता हे। जिसके 5 सदस्य होगे। ( सभी प्रकार के सलाहकार और जिला कानूनी अधिकारी अवैतनिक होगें)

     धारा- 12 राष्ट्रीय सलाहकार समिति
     उपधारा-1 राष्ट्रीय मुख्य सलाहकार  एक पद
     उपधारा-2राष्ट्रीय सलाहकार   बीस पद आवश्यकता अनुसार बढाए जा सकते है।
     
सलहाकार समिति के मुख्य सलाहकार और सलाहाकारों के लिए सोसायटी का सदस्य होना आवश्यकता नही है। राष्ट्रीय सलाहकार समिति में हर धर्म के ज्ञाता, ज्ञान विज्ञान के हर शास्त्रों के ज्ञाता, विभिन्न सरकारी विभागों के वर्तमान व सेवानिर्वित अधिकारियों/कर्मचारियों और समाजिक पंचायतों के भूतपूर्व व वर्तमान अध्यक्षों को शामिल किया जाऐगा।
 धारा- 13 सोसायटी के संरक्षक
 उपधारा-1 मुख्य संरक्षक  एक पद
 उपधारा-2 संरक्षक   पाँच पद आवश्यकता अनुसार बढ़ाए जा सकते है।


 उपधारा-3   
 सोसायटी समय और आवश्यकता अनुसार किसी भी विधयिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका के सदस्य और उद्योगपति को अपनी सोसायटी का संरक्षक नियुक्त कर सकती है।

 

धारा-14सोसायटी की कार्यकारिणी का कार्यकाल और कार्यकारणी गठित करने की विधि
 उपधारा-1सोसायटी का राष्ट्रीय अध्यक्ष आजीवन होगा उसको कोई भी सदस्य या पदाधिकारी चुनौती नही दे सकता।
 उपधारा-2सोसायटी का राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन स्वयं करेगा। आवश्यकता अनुसार मतदान भी कराया जा सकता है तथा मुख्यालय द्वारा कार्यकारिणी की विज्ञप्ति सरकार और प्रशासन को भेजी जाएगी।
 उपधारा-3सोसायटी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का कार्यकाल दो वर्ष का होगा आवश्यकता अनुसार कम या ज्यादा किया जा सकता है।
 उपधारा-4सोसायटी की शाखाओं की कार्यकारिणी का गठन करने के लिए सोसायटी का राष्ट्रीय अध्यक्ष शाखाओं के अध्यक्षों को स्वयं मनोनीत करेगा और शाखा अध्यक्ष कुल सदस्यों के दो तिहाही बहुमत से राष्ट्रीय अध्यक्ष की लिखित या मौखिक अनुमति लेकर अपनी कार्यकारिणी का गठन स्वयं कर सकेंगें। जिसकी विज्ञप्ति मुख्यालय की तरफ से सरकार और प्रशासन को भेजी जाएगी।
 उपधारा-5शाखाओं की कार्यकारिणी का गठन करने के लिए कम से कम पच्चीस सदस्य होने अति आवश्यक है।


 धारा-15सोसायटी की बैठक बुलाने का नोटिस तथा गणपूर्ति
 उपधारा-1सोसायटी की आम बैठक एक वर्ष में एक बार दिसम्बर या जनवरी में होगी।
 उपधारा-2सोसायटी की कार्यकारणियों की बैठक 6 मास में एक बार होगी। आवश्यकता अनुसार कभी भी बुलाई जा सकती है।
 उपधारा-3सोसायटी की आम बैठक बुलाने से पहले बैठक करने की तिथि और स्थल की जानकारी सभी सदस्यों को एक मास पहले देनी आवश्यक है।
 उपधारा-4सोसायटी की कार्यकारिणी की बैठक बुलाने से पहले तिथि और स्थल की जानकारी सभी पदाधिकारियों को मौखिक, लिखित या टेलिफोन के द्वारा नेटर्वक के माध्यम से पहुचा दी जाऐगी।
 उपधारा-5 सोसायटी के कुल सदस्य का दो तिहाही भाग गणपूर्ति माना जायेगा।


 धारा-16 सोसायटी के पदाधिकारियों के अधिकार
 राष्ट्रीय अध्यक्ष
 उपधारा-1भारत सरकार, राज्यों की सरकारों और प्रशासन के साथ जो भी खास पत्राचार होगा। उस पर हस्ताक्षर करेगा।
 उपधारा-2 किसी भी पदाधिकारी के त्यागपत्र देने पर उसका कार्यभार किसी भी कार्यकारणी के पदाधिकारी या कार्यकारी सदस्य को दे सकेगा।
 उपधारा-3राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी भी कार्यकारिणी के किसी भी पदाधिकारी को एक पद से ज्यादा पदों पर मनोनीत कर सकता है तथा किसी भी प्रदेश कार्यकारणी के प्रदेशाध्यक्ष का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंप सकता है
 उपधारा-4अगर सोसायटी देशहित, लोकहित, समाजहित और मानव हित में देश का विकास और समाज कल्याण के लिए भारत सरकार य राज्य सरकारों के सहयोग/अनुदान से कोई योजना चालू करेगी तो उसका पूरा कार्यभार राष्ट्रीय अध्यक्ष सम्भालेगा य फिर अपनी कार्यकारणी के किसी पदाधिकारी को भी इस कार्य के लिए मनोनित कर सकता है।
 उपधारा-5उपधारा 4 में दर्शायी गयी योजना पर अगर यह सोसायटी कार्य करगी तो उस योजना में कार्य करने वाले सभी पदाधिकारीयों और कर्मचारियों को भारत सरकार के समकक्ष वेतन व अन्य भुगतान देने का अधिकार इस सोसायटी को होगी।

 धारा-17            राष्ट्रीय प्रबन्ध निदेशक
 उपधारा-1सोसायटी के संविधान की धारा- 16 की उपधारा 4 में दर्शायी गयी योजना पर अगर कार्य करेगी तो उस योजना के प्रबन्ध का कार्य राष्ट्रीय प्रबन्ध सम्भालेगा।
 उपधारा-2सोसायटी के संविधान की धारा- 16 की उपधारा 4 में दर्शायी गयी योजना के विषय में सरकार से जो भी पत्राचार होगा। वह पत्राचार राष्ट्रीय प्रबन्ध निदेशक, राष्ट्रीय अध्यक्ष से विचार  करके और योजना की कार्यवाही की फाईल पर अग्रिम स्वीकृती लेकर करेगा और रोजाना का प्रबन्ध निदेशक होने के नाते योजना के हर लाभ और हानि का जिम्मेवार स्वयं व्यक्तिगततौर पर होगा। योजन कार्य में होने वाली हानी का राष्ट्रीय अध्यक्ष जिम्मेवार नही होगा।

 

 धारा-18                राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष
 उपधारा-1राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभालेगा।
 उपधारा-2राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में राष्ट्रीय अध्यक्ष के संविधानिक अधिकारों का उपयोग नही करेगा।

 धारा- 19                 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
 उपधारा-1राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष की अनुपस्थिती में राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष का कार्यभार संभालेगा।


 धारा- 20                 राष्ट्रीय महासचिव
 उपधारा-1राष्ट्रीय महासचिव सोसायटी की हर बैठक में बैठक की कार्यवाही रजिस्टर में दर्ज करेगा और राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति लेकर सरकार, प्रशासन और सोसायटी की शाखाओं के पदाधिकारियों के साथ पत्राचार करेगा।
 उपधारा-2सोसायटी के सदस्यों को सोसायटी की गतिविधियों से अवगत कराऐगा तथा सोसायटी की वार्षिक आम बैठक में पूरे वर्ष की आय और व्यय की जानकारी सभी सदस्यों को सहयोग देगा।
 उपधारा-3सोसायटी की कार्यकारिणी की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष को सहयोग देगा।




 धारा- 21                 राष्ट्रीय सचिव
 उपधारा-1राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय महासचिव की अनुपस्थिति में राष्ट्रीय महासचिव का कार्यभार संभालेगा।
 उपधारा-2राष्ट्रीय अध्यक्ष की अनुमति लेकर सरकार, प्रशासन और सोसायटी की शाखाओं के पदाधिकारियों के साथ पत्राचार करेगा तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष के निजि सचिव के रूप में कार्य करेगा।

 

  धारा- 22                 राष्ट्रीय संयुक्त सचिव
 उपधारा-1 राष्ट्रीय सयुक्त सचिव, राष्ट्रीय सचिव की अनुपस्थिति में राष्ट्रीय सचिव का कार्यभार संभालेगा।


   धारा- 23                 राष्ट्रीय वित्त सचिव
 उपधारा-1राष्ट्रीय वित्त सचिव  शाखाओं के वित्त सचिव और सदस्यों से चंदा प्राप्त करेगा। राष्ट्रीय कार्यकारणी कैश बुक मे लिखेगा।
 उपधारा-2कैशबुक, रसीद बुक, स्टाक रजिस्टर और वित्त सम्बन्धित सभी अभिलेख अपने पास रखेगा।
 उपधारा-3हर 6 मास के बाद आय और व्यय का ब्यौरा राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव को देगा।


    धारा- 24                 राष्ट्रीय लेखा परिक्षक
 उपधारा-1राष्ट्रीय लेखा परिक्षक सोसायटी के हिसाब किताब और आय-व्यय की हर एक वर्ष के बाद परीक्षा करेगा और उसमें पायी गई त्रुटियों से राष्ट्रीय को अवगत कराएगा।



    धारा- 25                 राष्ट्रीय प्रकाशन सचिव
 उपधारा-1
राष्ट्रीय प्रकाशन सचिव सोसायटी की गतिविधियों और सोसायटी के द्वारा राष्ट्रहित, लोकहित और मानवहित में किए गये कार्यकलापो और सोसायटी की उपलब्धियों पर और राष्ट्रहित में भविष्य मे किए जाने वाले कार्यो पर एक समारिका जारी करेगा।





     धारा- 26                 राष्ट्रीय प्रचार सचिव
 उपधारा-1 राष्ट्रीय प्रचार सचिव जनसाधारण में सोसायटी के उद्देश्यों, उपलब्धियों व सोसायटी के अन्य कार्यकलापों का प्रचार करेगा। नागरिकों को सोसायटी का सदस्य बनने के लिए प्रेरित करेगा।


      धारा- 27                 राष्ट्रीय प्रैस सचिव
 उपधारा-1राष्ट्रीय प्रैस सचिव सोसायटी की आम और खास बैठकों की गतिविधियों की जानकारी प्रैस नोट के द्वारा रिर्पोटरों को देगा।
 उपधारा-2सोसायटी की आम और खास सभा और कार्यकारिणी की सभी बैठको में सभी सम्बन्धित प्रैस रिर्पोटरों को आमन्त्रित करेगा और उनके स्वागत और खान-पान की जिम्मेवारी प्रैस सचिव की होगी।


       धारा- 28                 राष्ट्रीय मुख्य संगठन सचिव
 उपधारा-1राष्ट्रीय मुख्य संगठन सचिव सोसायटी की आम और खास सभा की बैठक होने पर बैठक का संगठनात्मक प्रबन्ध करेगा।
 उपधारा-2सोसायटी की बैठक में संगठनात्मक कार्यवाही के विषय से सम्बन्धित हर पदाधिकारी और सदस्य राष्ट्रीय मुख्य संगठन सचिव का आदेश मानने पर बाध्य होगा।


 

        धारा- 29                राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य
 उपधारा-1राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्यों को सोसायटी के पदाधिकारियों के सामान दर्जा होगा तथा महत्वपूर्ण निर्णय के लिए बुलाई गयी बैठक में उनकी उपस्थिति होनी अति आवश्यक है और शाखा अध्यक्षों से उच्च दर्जा माना जाऐगा।


 

 धारा- 30पदाधिकारियों और सदस्यों को बर्खास्त करना तथा रिक्त स्थान भरना
 उपधारा-1 यदि पदाधिकारी स्वयं त्यागपत्र दे दे।
 उपधारा-2 यदि पदाधिकारी की मृत्यु हो जाए।
 उपधारा-3 यदि एक वर्ष पूरा होने पर चंदा जमा न कराए।
 उपधारा-4 यदि सोसायटी विरोधी गतिविधियां करे या  शामिल हो।
 उपधारा-5 राष्ट्रीय अध्यक्ष रिक्त स्थानों को भर सकेगा।
 उपधारा-6किसी भी पदाधिकारी और सदस्य को बर्खास्त करने से पहले उसको आरोप-पत्र जारी किया जाऐगा और राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा खुली और निष्पक्ष जांच करायी जाएगी। अपराध सिद्ध होने पर ही बर्खास्त किया जाऐगा।

 

 धारा- 31 फंड
 उपधारा-1सोसायटी राशि अपने सदस्यों से चंदे के रूप में लेगी और अन्य व्यक्ति सोसायटी के विकास में चंदा देना चाहे तो उनको रसीद देकर चंदा प्राप्त किया जा सकेगा।
 उपधारा-2सोसायटी का फंड सोसायटी के सदस्यों की भलाई के लिए खर्च किया जाऐगा। जिसकी अग्रिम स्वीकृति राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेनी अति आवश्यक है।

 धारा- 32  सहयोग
 उपधारा-1सोसायटी हर ऐसी सोसायटी के सदस्यों की भलाई के लिए आर्थिक सहयोग दे सकेगी। जो प्रदेश सरकार या भारत सरकार द्वारा पंजीकृत हो और उसके उद्देश्य हमारी सोसायटी से मिलते हो।
 उपधारा-2सोसायटी किसी भी राजनैतिक पार्टी वर्कर और पदाधिकारी को अपनी कार्यकारणी का पदाधिकारी बना सकती है। जो अपनी पार्टी राजनिति से अलग समय निकालकर समाज के हित में कार्य कर सकने का इच्छुक हो।


 धारा- 33 खाता खोलना
 उपधारा-1सोसायटी की रकम भारत के किसी भी प्रदेश के राष्ट्रीयकृत बैंक में रखी जाऐगी।
 उपधारा-2बैक का खाता तीन पदाधिकारियों के नाम से खोला जाऐगा। जो राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय फाईनैंस सैक्टरी के नाम से खोला जाऐगा। जब भी बैंक से धन निकाला जाऐेगा तो उपरोक्त पदाधिकारियों में से दो पदाधिकारि के हस्ताक्षर हुआ करेंगे। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष के हस्ताक्षर जरूरी है।

 

 धारा- 34 यात्रा
 उपधारा-1सम्बन्धित कार्यकारिणी के निर्देश पर सोसायटी के कार्य से कोई भी सदस्य या पदाधिकारी अपने निवास स्थान से बाहर जाएगा तो अपनी कार्यकारिणी से (शाखा) उसका आने-जाने का किराया और खास-पान का खर्च सोसायटी कोष से दिया जायेगा।

 


 धारा- 35 बिलों की स्वीकृति और सामान आदि खरीदना
 उपधारा-1सोसायटी के कार्यो के लिए खर्च की गई राशि के 500 रूपये से ज्यादा के बिल राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वीकृत करेगा।
 उपधारा-2सोसायटी के कार्यो के लिए खर्च की गई राशि के 500 रूपये से कम के बिल राष्ट्रीय महासचिव स्वीकृत कर सकेगा।
 उपधारा-3सोसायटी के इस्तेमाल के लिए कोई सामान खरीदने से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष या राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सहमति लेनी अति आवश्यक है।
 उपधारा-4सोसायटी के लिए खरीदा गया समान स्टाक रजिस्टर में दर्ज होगा और स्टाक रजिस्टर राष्ट्रीय फाईनैंस सैक्टरी के पास रहेगा।
 उपधारा-5सोसायटी अपना कार्यलय बनाने के लिए भवन किराये पर ले सकती है और क्षमता अनुसार अपना प्लाट खरीदकर भवन भी बना सकती है।
 उपधारा-6प्रत्येक बिल पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के हस्ताक्षर होन अति आवश्यक है।
 उपधारा-7यदि लेखा परिक्षक किसी बिल को रद्द कर देता है तो वह बिल कार्यकारणी की बैठक में प्रस्तुत किया जा सकता है और कार्यकारिणी के बहुमत से बिल स्वीकृत या रद्द किया जा सकता है। अगर बिल रद्द हो जाए तो बिल प्रस्तुत करने वाले सदस्य या पदाधिकारी से उस बिल की राशि वसूल की जाऐगी।


 धारा- 36 प्रतिनिधि मण्डल
 उपधारा-1प्रतिनिधि मण्डल में कार्यकारिणी के कोई भी 5 पदाधिकारी शामिल होगें। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष का या शाखा अध्यक्ष का होना आवश्यक है।
 उपधारा-  2प्रतिनिधि मण्डल देश से भ्रष्टाचार मिटाने, अपराधों को समाप्त करने, सरकार की नितियों  और सुविधाओं को जन-जन तक पहुंचाने, नागरिकों के मूल सैंविधानिक अधिकारों, कानूनी अधिकारों और मानव अधिकारों का संरक्षण कराने और प्रशासन, सरकार और नागरिकों के बीच मधुर संबन्ध बनाने के लिए सरकार और प्रशासन से मिटिंगे ले सकता है।
 उपधारा-3 सोसायटी के द्वारा चलाए जा रहे सर्घष के दौरान प्रतिनिधि मंडल को सरकार और प्रशासन से मिलने से पहले कार्यकारिणी की सलाह लेनी आवश्यक है।


धारा-37सोसायटी के सदस्यों के मुकदमें और जनहित याचिकाएं न्यायालयों में दायर करने का अधिकार
 उपधारा-1सोसायटी का सदस्य जो एक वर्ष से ज्यादा सोसायटी का सदस्य रहा हो और सोसायटी की गतिविधियों के कारण उस के ऊपर कोई मुकदमा दायर हो गया हो तो उस मुकदमें का पूरा खर्च सोसायटी कोष से किया जाएगा।
 उपधारा-2सोसायटी की भलाई के लिए सदस्यों की शिकायत पर जो भी पत्राचार सरकार या प्रशासन के साथ किया जायेगा। उसका टाईप और डाक का खर्च 300 रूपये तक सोसायटी के कोष से दिया। बाकि खर्च स्वयं वहन करना होगा।
 उपधारा-3सोसायटी के द्वारा जनहित याचिकाए दायर करने का अधिकार राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव, शाखा अध्यक्ष और शाखा महासचिवों का होगा।

 


 धारा-38  प्राथिमिक सदस्यता समाप्त करना
 उपधारा-3 जो सदस्य सोसायटी का अनुशासन तोडे़गा, सोसायटी के संविधान को नही मानेगा, सोसायटी के धन का दुरूपयोग करेगा, सोसायटी विरोधी गतिविधियों में शामिल होगा या स्वयं सोसायटी विरोधी गतिविधि करेगा। उसकी सदस्यता दोष साबित होने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा समाप्त कर दी जाऐगी।

 

 धारा-39 न्यायालय की सीमाए
 उपधारा-1न्यायपालिका की निति और भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा- 179 और 182 के अनुसार।